‘मोदी ने जो किया, मानव इतिहास में कभी नहीं हुआ’, ऑस्ट्रेलियाई PM अल्बनीज ने की जमकर तारीफ

नई दिल्ली

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भारत में ऊर्जा की पहुंच बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि मोदी के नेतृत्व में भारत में जितने लोगों तक एनर्जी की पहुंच बनी है, उतनी किसी भी दशक, क्षेत्र या देश में मानव इतिहास के दौरान नहीं हुई। अल्बनीज ने यह बात एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के कार्यक्रम में कही। उन्होंने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मजबूत होते संबंधों का भी जिक्र किया। अल्बनीज ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के भारत के साथ अच्छे संबंध हैं और पीएम मोदी ऐसे नेता हैं, जिनके साथ उनके देश ने करीबी रिश्ते विकसित किए हैं।

एंथनी अल्बनीज की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव बना हुआ है। अमेरिका, इजरायल और ईरान से जुड़े युद्ध के बाद होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इसका असर कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है। पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों को ऊर्जा की कमी का सामना करना पड़ा है, जबकि भारत में सप्लाई काफी हद तक स्थिर बनी रही। इस दौरान ईंधन की कीमतों में भी सीमित बढ़ोतरी हुई।

अलग-अलग देशों से बढ़ाया आयात
पीएम मोदी ने इस साल की शुरुआत में भारत की ऊर्जा स्थिति का जिक्र करते हुए कहा था कि अलग-अलग देशों से आयात बढ़ाने से देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है। मोदी ने मई में बजट सत्र के दौरान लोकसभा में बताया था कि भारत पहले 27 देशों से ऊर्जा का आयात करता था, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 41 हो गई है। उन्होंने कहा कि देशभर में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई जारी रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

पश्चिम एशिया में संघर्ष के असर से बचाना
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के भारत की अर्थव्यवस्था, आपूर्ति व्यवस्था और जरूरी सामान पर असर की सरकार ने समीक्षा भी की थी। इस दौरान आम लोगों और कारोबारियों के लिए सप्लाई में रुकावट कम करने के उपायों पर चर्चा हुई थी। पीएम मोदी ने भारत के बढ़े हुए ऊर्जा आयात स्रोतों को देश की स्थिर ऊर्जा आपूर्ति से जोड़ते हुए यह जानकारी दी थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी अप्रैल में भारत की तेल खरीद को लेकर यही बात कही थी। उन्होंने कहा कि भारत अलग-अलग देशों से तेल खरीदना जारी रखे हुए है। इस खरीद में 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखा जा रहा है।

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