रूस के खतरनाक डूम्सडे हथियार: दुनिया में बढ़ा परमाणु खतरा

नई दिल्ली

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक खतरनाक हथियारों को जमा कर रहे हैं. ये हथियार इतने भयानक हैं कि इन्हें दबाने मात्र से पूरा एक देश तबाह हो सकता है. रूस के वैज्ञानिक परमाणु ऊर्जा से चलने वाले ड्रोन, हाइपरसोनिक मिसाइलें, स्पेस में हमला करने वाले हथियार और परमाणु टॉरपीडो बना रहे हैं. पश्चिमी देशों के विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया 1962 की क्यूबा मिसाइल संकट के बाद अब सबसे ज्यादा परमाणु खतरे के करीब पहुंच गई है.

पोसाइडन: समुद्र के अंदर का 'डूम्सडे' हथियार
रूस का सबसे चर्चित हथियार पोसाइडन है. यह एक परमाणु ऊर्जा से चलने वाला विशाल अंडरवाटर ड्रोन है, जो छोटी पनडुब्बी जितना बड़ा है. यह हजारों किलोमीटर तक समुद्र के अंदर यात्रा कर सकता है. दुश्मन के तट के पास पहुंचकर यह फट सकता है.

विस्फोट से विशाल रेडियोएक्टिव सुनामी उठ सकती है, जो तटीय शहरों और नौसैनिक अड्डों को पूरी तरह नष्ट कर देगी. पुतिन का दावा है कि इसे रोका नहीं जा सकता. पश्चिमी विशेषज्ञ इसे डूम्सडे वेपन कहते हैं. रूस ने हाल ही में इसका सफल परीक्षण किया है. इसे ले जाने वाली नई पनडुब्बी खाबारोवस्क भी तैयार हो रही है.

बुरेवेस्तनिक: फ्लाइंग चेरनोबिल मिसाइल
बुरेवेस्तनिक मिसाइल को फ्लाइंग चेरनोबिल भी कहा जाता है. यह परमाणु रिएक्टर से चलने वाली क्रूज मिसाइल है, जिसकी रेंज अनलिमिटेड बताई जाती है. पुतिन का कहना है कि यह कई दिनों तक उड़ सकती है.

2019 में इसके परीक्षण के दौरान रूस में विकिरण रिसाव हुआ था, जिसमें कई वैज्ञानिक मारे गए थे. फिर भी रूस इसे विकसित कर रहा है. पश्चिमी देश इसे बहुत खतरनाक मानते हैं क्योंकि इसमें रेडियोएक्टिव कचरा फैलने का खतरा है.

सरमत: दुनिया की सबसे भयानक मिसाइल
Sarmat या Satan-2 रूस की नई इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल है. यह 200 टन से ज्यादा भारी है. इसमें कई परमाणु वॉरहेड लगाए जा सकते हैं, जो अलग-अलग शहरों को निशाना बना सकते हैं.

पुतिन ने हाल ही में इसका सफल परीक्षण किया और कहा कि साल के अंत तक इसे युद्ध के लिए तैयार कर लिया जाएगा. यह मिसाइल दक्षिणी ध्रुव से भी होकर दुश्मन पर हमला कर सकती है, जहां रडार नहीं होते.

हाइपरसोनिक हथियार  
एवनगार्ड: यह हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल है, जो 24 हजार किलोमीटर प्रति घंटे से भी तेज गति से दुश्मन पर टूट पड़ता है. बीच में अपना रास्ता बदल सकता है.
किंझल: हवा से छोड़ी जाने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल. यूक्रेन में इसका इस्तेमाल हो चुका है.
जिरकॉन: समुद्र से छोड़ी जाने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल, जो 11265 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जहाजों को डुबो सकती है.
ये सभी मिसाइलें इतनी तेज हैं कि मौजूदा डिफेंस सिस्टम उन्हें रोक पाना मुश्किल है.

स्पेस में युद्ध: सैटेलाइट ब्लाइंड करने वाला हथियार
रूस संभवतः स्पेस में भी परमाणु हथियार विकसित कर रहा है. अमेरिका का आरोप है कि रूस एक ऐसा सैटेलाइट बना रहा है जो दुश्मन के सैटेलाइट को उड़ा या ब्लाइंड कर सकता है. इससे GPS, कम्युनिकेशन और सैन्य नेटवर्क बंद हो सकते हैं. रूस इससे इनकार करता है, लेकिन उसने UN में इस पर प्रस्ताव को वीटो कर दिया.

पेरेसवेट लेजर और S-500 डिफेंस सिस्टम
पेरेसवेट लेजर सिस्टम सैटेलाइट को अंधा कर सकता है. S-500 Prometheus सिस्टम स्टेल्थ विमान, बैलिस्टिक मिसाइल और स्पेस ऑब्जेक्ट्स को मारने का दावा करता है.

क्यों बना रहा है रूस ये हथियार?
पुतिन इन हथियारों को अजेय बताते हैं. ये हथियार न सिर्फ युद्ध जीतने के लिए हैं, बल्कि पश्चिमी देशों को डराने और उन्हें झुकाने के लिए भी हैं. रूस यूक्रेन युद्ध में फंसा है. लगातार परमाणु खतरे की बात कर रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया अब 1962 के बाद सबसे ज्यादा परमाणु खतरे में है.

रूस के ये हथियार सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि आतंक फैलाने का हथियार बन गए हैं. पुतिन का सुपरवेपन आर्सेनल दुनिया के लिए बड़ी चिंता का विषय है. पोसाइडन, सरमत, बुरेवेस्तनिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें परमाणु युद्ध के खतरे को बढ़ा रही हैं. यदि इनमें से कोई हथियार इस्तेमाल हुआ तो पूरा क्षेत्र तबाह हो सकता है.

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