शिवरीनारायण को विकास की बड़ी सौगात : महानदी पर 63 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बनेगा नया पुल

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज माता शबरी की पावन नगरी शिवरीनारायण में तीन दिवसीय शिवरीनारायण महोत्सव के शुभारंभ के अवसर पर महानदी पर 63 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से नए पुल के निर्माण की घोषणा की। उन्होंने नगर के गंदे पानी के समुचित शोधन के लिए एसटीपी प्लांट की स्थापना तथा राम वनगमन पर्यटन परिपथ के अंतर्गत शिवरीनारायण के विकास की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने शिवरीनारायण को नगरपालिका बनाने की दिशा में आवश्यक सर्वे कराने की बात कही।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से शिवरीनारायण का विशेष महत्व है। यहां की आवश्यकताओं और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए अधोसंरचना एवं नागरिक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। महानदी पर नए पुल के निर्माण से क्षेत्र में आवागमन अधिक सुगम होगा और आसपास के गांवों एवं क्षेत्रों को बेहतर संपर्क सुविधा मिलेगी। एसटीपी प्लांट की स्थापना से नगर की स्वच्छता व्यवस्था सुदृढ़ होने के साथ महानदी के संरक्षण में भी सहायता मिलेगी।

माता शबरी की पावन धरती पर आना मेरे लिए सौभाग्य : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री  साय ने शिवरीनारायण महोत्सव एवं शारदीय नवरात्रि की प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान राम के चरणों से पावन हुई माता शबरी की इस धरती पर आना उनके लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि माता शबरी के बुलावे पर वे सपत्नीक यहां पहुंचे हैं। शिवरीनारायण की भूमि आस्था, भक्ति और हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर गौमाता की पूजा की और मां चित्रोत्पला गंगा की महाआरती में शामिल होकर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं कल्याण की कामना की। उन्होंने शिवरीनारायण में प्रतिदिन संध्या आरती की परंपरा पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी परंपराएं हमारी आस्था और संस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ती हैं। उन्होंने इस परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

मोदी की गारंटी को तेजी से धरातल पर उतार रही सरकार

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रदेशवासियों को दी गई गारंटियों को पूरा करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सरकार गठन के बाद शपथ ग्रहण के 24 घंटे के भीतर आयोजित पहली मंत्रिपरिषद की बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति का निर्णय लिया गया। इनमें से लगभग साढ़े 11 लाख आवास पूर्ण हो चुके हैं और प्रतिदिन लगभग 1600 आवासों का निर्माण पूरा हो रहा है।

उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए 15 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 6 हजार आवास दिए जा चुके हैं। इसी प्रकार प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के अंतर्गत विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए भी 32 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक जरूरतमंद परिवार के सिर पर पक्की छत हो और वह सम्मानपूर्वक जीवन जी सके।

किसानों की समृद्धि सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों से किए गए वादों को सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पूरा किया है। किसानों को वर्षों से लंबित धान का बकाया बोनस दिया गया है। प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है। किसानों को धान बेचने में किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए प्रदेश में 250 से अधिक नए धान खरीदी केंद्र भी खोले गए हैं।

उन्होंने कहा कि वनांचल में रहने वाले परिवारों की आय बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। तेंदूपत्ता संग्रहण की दर बढ़ाकर 5500 रुपए प्रति मानक बोरा की गई है। तेंदूपत्ता संग्राहकों को चरण पादुकाएं भी प्रदान की जा रही हैं। सरकार गांव, गरीब, किसान और वनवासी परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

महतारी वंदन से मजबूत हो रहा माताओं-बहनों का आर्थिक स्वावलंबन

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से पात्र माताओं-बहनों को प्रतिमाह एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। यह राशि महिलाओं के लिए केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि उनके आत्मविश्वास और स्वावलंबन को मजबूत करने का माध्यम बनी है। अनेक महिलाएं इस राशि का उपयोग परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ छोटे व्यवसाय शुरू करने और अपनी आय बढ़ाने में कर रही हैं।

लगभग 50 हजार श्रद्धालुओं ने किए रामलला के दर्शन

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि भगवान राम का छत्तीसगढ़ से अत्यंत आत्मीय संबंध है। छत्तीसगढ़ को भगवान राम का ननिहाल माना जाता है और यहां उन्हें भांजे के रूप में सम्मान देने की विशिष्ट परंपरा है। प्रदेशवासियों को अयोध्या में प्रभु रामलला के दर्शन कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने रामलला दर्शन योजना प्रारंभ की है। इस योजना के माध्यम से अब तक लगभग 50 हजार श्रद्धालु अयोध्या जाकर प्रभु रामलला के दर्शन कर चुके हैं।

उन्होंने कहा कि शिवरीनारायण भी भगवान राम की वनगमन यात्रा से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। राम वनगमन पर्यटन परिपथ के अंतर्गत इसके विकास से यहां धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को नई गति मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आजीविका के अवसर भी बढ़ेंगे।

बस्तर में शांति के साथ विकास की नई शुरुआत

मुख्यमंत्री ने बस्तर में आ रहे सकारात्मक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि नियद नेल्लानार योजना और अग्रणी बस्तर अभियान के माध्यम से उन दूरस्थ क्षेत्रों तक शासन की योजनाएं और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं, जो लंबे समय तक विकास से वंचित रहे।

उन्होंने कहा कि बस्तर में 421 बंद पड़े स्कूलों को फिर से प्रारंभ किया गया है। जहां कभी नक्सलवाद के कारण शिक्षा और विकास की राह कठिन थी, वहां आज बच्चे स्कूल जा रहे हैं और विकास की नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। सरकार का लक्ष्य बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में शांति, सुरक्षा और विकास को स्थायी आधार देना है।

विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज, वन संपदा और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इस राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने में छत्तीसगढ़ महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए अधोसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, रोजगार और आधुनिक तकनीक सहित सभी क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है। सरकार और समाज के सामूहिक प्रयास से विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य भी साकार होगा।

नागरिकों को समय पर सेवाएं देना सुशासन का मूल उद्देश्य

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नागरिकों के काम सरलता और समयबद्ध तरीके से हों, इसके लिए राज्य सरकार ने सुशासन एवं अभिसरण विभाग का गठन किया है और शासकीय कार्यप्रणाली में आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। पारदर्शिता और जवाबदेही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से प्रदेश के नागरिक चौबीसों घंटे अपनी समस्याएं और शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। शिकायतों का निर्धारित समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। जनहित के कार्यों में अनावश्यक विलंब अथवा लापरवाही करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई भी की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से 36 विभागों की 700 से अधिक सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इससे नागरिकों को छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और वे घर बैठे अनेक शासकीय सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि लगभग 6 हजार ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सुविधा केंद्र प्रारंभ किए जा चुके हैं। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को डिजिटल सेवाओं के साथ नकद निकासी जैसी सुविधाएं भी स्थानीय स्तर पर मिल रही हैं। सरकार का उद्देश्य तकनीक के माध्यम से शासन और नागरिकों के बीच की दूरी को कम करना है।

जल संरक्षण को जनभागीदारी से आगे बढ़ाने का आह्वान

केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री  तोखन साहू ने शिवरीनारायण के धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि तीन नदियों का संगम और माता शबरी की भक्ति इस धरती को विशिष्ट पहचान प्रदान करती है। उन्होंने जल संरक्षण को वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताते हुए लोगों से इसमें सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। साथ ही महिलाओं के सम्मान एवं सुरक्षा के प्रति समाज को संकल्पित होने की बात कही।

सांसद मती कमलेश जांगड़े ने कहा कि जल है तो कल है। उन्होंने लोगों से नदियों एवं जलस्रोतों के संरक्षण, घरों में सोख्ता गड्ढे बनाने तथा जल की प्रत्येक बूंद को सहेजने की अपील की। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने का भी आग्रह किया।

 इस अवसर पर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री  तोखन साहू, वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी, मती कौशल्या देवी साय, सांसद मती कमलेश जांगड़े, विधायक  रामसुंदर दास,  नारायण चंदेल, पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष  राजा पांडे सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी और नागरिक उपस्थित थे।

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