म्यांमार बना दुनिया का सबसे बड़ा अवैध अफीम उत्पादक, NCB रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

नई दिल्ली
 भारत का पड़ोसी देश म्यांमार अब गैर कानूनी अफीम के उत्पादन के मामले में अफगानिस्तान को पीछे छोड़ दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है। 2021 में सैन्य तख्तापलट के बाद आर्थिक संकट और गृहयुद्ध जैसी स्थिति के कारण म्यांमार में अफीम का उत्पादन पिछले 10 वर्षों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। यह जानकारी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की शुक्रवार को जारी वार्षिक रिपोर्ट में दी गई।

एनसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक, म्यांमार का शान राज्य अवैध अफीम की खेती का सबसे ब़ड़ा केंद्र बन गया है। NCB ने चेतावनी दी है कि 'म्यांमार से अफीम की तस्करी का नया रास्ता सीधे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से होकर गुजरता है, जिससे भारत की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा होता है। यह रास्ता आतंकवाद को फंडिंग और हथियारों की तस्करी से भी जुड़ा है।

खुली सीमा बनी समस्या
    रिपोर्ट में कहा गया है कि खुली सीमा और 'फ्री मूवमेंट रिजीम' (आवाजाही की खुली व्यवस्था) तस्करी को आसान बनाते हैं, जिससे न केवल स्थानीय स्तर पर नशे की लत बढ़ती है, बल्कि विद्रोही समूहों को फंडिंग मिलती है।

अफगानिस्तान-पाकिस्तान-ईरान कॉरिडोर सबसे बड़ा तस्करी मार्ग
    NCB के मुताबिक, अफगानिस्तान-पाकिस्तान-ईरान कॉरिडोर अभी भी दुनिया का सबसे बड़ा अफीम तस्करी मार्ग बना हुआ है, लेकिन भारत को सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय तस्करी मार्गों से रणनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है।
    रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि कोकीन की तस्करी वाले देशों में तस्करी से जुड़ी हिंसा में बढ़ोतरी यह दिखाती है कि ड्रग मार्केट में प्रतिस्पर्धा कैसे सुरक्षा का एक बड़ा संकट पैदा कर सकती है। इसमें आगे कहा गया है कि भारत के समुद्री पड़ोस पर करीबी नज़र रखने की जरूरत है।

दुनियाभर में बढ़ रही नशे का लत
NCB ने पाया है कि डार्कनेट मार्केट, सिंथेटिक ड्रग्स और इंटरनेशनल पोस्टल सिस्टम के आपस में जुड़ने से दुनिया भर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। दुनिया भर में ड्रग्स के इस्तेमाल पर रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2023 में दुनिया भर में लगभग 31.6 करोड़ लोगों (15 से 64 वर्ष आयु वर्ग) ने कम से कम एक बार किसी नशीले पदार्थ का सेवन किया। वर्ष 2013 में यह संख्या 24.6 करोड़ थी। यानी पिछले एक दशक में वैश्विक ड्रग्स उपयोग में लगभग 29 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

सिंथेटिक ड्रग्स सबसे बड़ा खतरा
रिपोर्ट में निटाजेन्स नामक सिंथेटिक ओपिओइड को उभरता हुआ वैश्विक खतरा बताया गया है। यह ड्रग हेरोइन से लगभग 500 गुना अधिक शक्तिशाली है। इसके अलावा एक साथ कई तरह के नशीले पदार्थों का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है, जिससे मौत और गंभीर स्वास्थ्य जोखिम की आशंका बढ़ गई है। एनसीबी ने कहा है कि इस पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।

ड्रग्स से बढ़ रही हिंसा
NCB ने चेतावनी दी है कि ड्रग्स तस्करी केवल नशे तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इससे हिंसा और संगठित अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, इक्वाडोर में कोकीन तस्करी को लेकर गैंगवार के कारण वर्ष 2020 से 2023 के बीच हत्या की दर लगभग छह गुना बढ़ गई।
मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए हो रही ड्रग्स की सप्लाई
NCB के अनुसार, टेलीग्राम, व्हाट्सएप और सिग्नल जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म भारत समेत दुनिया भर में ड्रग्स की सप्लाई के लिए अहम माध्यम बनकर उभरे हैं। इससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने नई तकनीकी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

 

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