क्या सच में HR मैनेजर हैं निदा खान? नासिक धर्मांतरण कांड पर TCS ने तोड़ी चुप्पी

 नासिक

हाल ही में आईटी दिग्गज टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की नासिक इकाई में यौन दुर्व्यवहार और धर्मांतरण के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस मामले ने काफी तूल पकड़ लिया है, जिसके बाद कंपनी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कई अफवाहों का खंडन किया है और अपनी आगे की कार्रवाई के बारे में विस्तार से बताया है। साथ ही कंपनी ने ये भी स्पष्ट किया है कि नासिक में निदा खान नाम की कर्मचारी का HR मैनेजर पद से कोई लेना-देना नहीं है।

'एचआर मैनेजर' की भूमिका पर कंपनी की सफाई
दरअसल इस विवाद में एक महिला (निदा खान) का नाम बार-बार उछाला जा रहा था और उसे नासिक यूनिट की एचआर मैनेजर बताया जा रहा था। टीसीएस ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उक्त महिला न तो एचआर मैनेजर है और न ही उसका कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया से कोई लेना-देना है। वह केवल एक 'प्रोसेस एसोसिएट' के रूप में काम कर रही थी और उसके पास लीडरशिप या मैनेजमेंट से जुड़ी कोई जिम्मेदारी नहीं थी।

नासिक यूनिट बंद होने की अफवाहें झूठीं
ऐसी खबरें फैल रही थीं कि इस बड़े विवाद के बाद टीसीएस ने अपनी नासिक फैसिलिटी को बंद कर दिया है। कंपनी ने इन दावों को पूरी तरह से असत्य और निराधार बताया है। यूनिट का कामकाज पहले की तरह ही जारी है।

'जीरो-टॉलरेंस' नीति और सुरक्षा का आश्वासन
टीसीएस ने अपने बयान में कहा कि वह कर्मचारियों के कल्याण और संस्थागत आचरण के उच्चतम मानकों का पालन करती है। कंपनी ने दोहराया कि वह अपने हर एक कर्मचारी की सुरक्षा, सम्मान और भलाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किसी भी प्रकार के दबाव या दुर्व्यवहार के खिलाफ कंपनी की 'जीरो-टॉलरेंस' नीति है, यानी ऐसे मामलों में कोई भी कोताही नहीं बरती जाएगी।

टाटा संस के चेयरमैन की कड़ी प्रतिक्रिया
इससे पहले इसी सप्ताह, टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने भी इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी थी। उन्होंने नासिक ब्रांच से सामने आ रहे इन आरोपों को बेहद चिंताजनक और दुखद बताया था। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस मामले को पूरी गंभीरता से लिया जा रहा है और आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

आंतरिक चैनलों पर कोई शिकायत नहीं मिली
कंपनी ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात यह बताई है कि उनके पास कर्मचारियों की शिकायत सुनने के लिए जो आंतरिक व्यवस्थाएं हैं, वहां इस मामले की कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। शुरुआती जांच से पता चला है कि कंपनी की 'एथिक्स कमेटी' या POSH (यौन उत्पीड़न रोकथाम) चैनलों पर इस तरह के आरोपों से जुड़ी कोई भी शिकायत प्राप्त नहीं हुई थी।

जांच के लिए बाहरी एजेंसियों की नियुक्ति
मामले की गंभीरता को देखते हुए और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए टीसीएस ने कड़े कदम उठाए हैं। कंपनी ने एक विशेष निगरानी पैनल का गठन किया है। आंतरिक जांच को सही तरीके से आगे बढ़ाने के लिए दो बड़ी बाहरी एजेंसियों को स्वतंत्र सलाहकार के रूप में काम पर रखा गया है: मशहूर कंसल्टेंसी फर्म डेलॉयट और जानी-मानी लॉ फर्म ट्राईलीगल। टीसीएस ने पुलिस और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भी जांच में पूरा सहयोग देने का वादा किया है ताकि मामले की पारदर्शी जांच हो सके और दोषियों को सजा मिल सके।

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