विदिशा से मोहभंग या नया सियासी गणित? शिवराज मामा की रायसेन में बढ़ती सक्रियता ने छेड़ी जन चर्चा

रायसेन 

मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक दिलचस्प हलचल देखने को मिल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का झुकाव तेजी से रायसेन की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। कभी उनकी राजनीति का केंद्र रहे विदिशा क्षेत्र से दूरी और रायसेन में बढ़ती सक्रियता ने सियासी गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

हाल ही में आयोजित सांसद खेल महोत्सव के बाद अब रायसेन में तीन दिवसीय राष्ट्रीय कृषि मेले का आयोजन कराया जा रहा है। यह महज कार्यक्रमों की श्रृंखला नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक परिदृश्य संकेत के रूप में देखा जा रहा है। लगातार हो रहे आयोजनों से साफ है कि शिवराज सिंह चौहान का फोकस अब इस क्षेत्र पर ज्यादा केंद्रित हो रहा है। राजनीतिक जानकार इसे भविष्य की रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं।

दरअसल, विदिशा में पिछले कुछ समय से भाजपा के अंदरूनी समीकरण और खींचतान की खबरें सामने आती रही हैं। स्थानीय स्तर पर बढ़ते असंतोष और गुटबाजी ने भी सियासी माहौल को प्रभावित किया है। ऐसे में रायसेन में बढ़ती सक्रियता को विदिशा से मोहभंग के रूप में भी देखा जा रहा है। हालांकि, पार्टी स्तर पर इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।

इधर रायसेन में भाजपा के वरिष्ठ नेता रामपाल सिंह के साथ शिवराज सिंह चौहान की बढ़ती नजदीकियां भी जन चर्चा का विषय बनी हुई हैं। कार्यक्रमों में दोनों नेताओं की एक साथ मौजूदगी और समन्वय से यह संकेत मिल रहे हैं कि जिले में संगठनात्मक और राजनीतिक मजबूती के लिए नए समीकरण तैयार किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में डॉ चौधरी का रामपाल सिंह राजपूत के करीब आना भी कई मायनों में अहम माना जा रहा है।

वहीं, वर्ष 2020 के बाद से डॉ नरोत्तम मिश्रा शेजवार (डॉ शेजवार) और शिवराज मामा के बीच बनी दूरी भी सियासी जन चर्चा का केंद्र रही है। पहले जहां दोनों के बीच मजबूत तालमेल देखने को मिलता था। वहीं अब राजनीतिक मंचों पर यह सामंजस्य पहले जैसा नजर नहीं आता। इसका सीधा असर क्षेत्रीय राजनीति पर भी पड़ रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी परिसीमन (डिलिमिटेशन) को लेकर भी बीजेपी के कद्दावर लोकप्रिय बड़े नेताओं की सक्रियता बढ़ी है। रायसेन में शिवराज मामा के लगातार हो रहे बड़े आयोजन कहीं न कहीं इस बात की ओर इशारा करते हैं कि भविष्य के चुनावी नक्शे को ध्यान में रखकर राजनीति की नई जमीन तैयार की जा रही है। यदि परिसीमन में बदलाव होता है, तो रायसेन क्षेत्र का महत्व और बढ़ सकता है। कुल मिलाकर, विदिशा से दूरी और रायसेन में बढ़ती सक्रियता को केवल संयोग नहीं माना जा सकता। यह सियासत का सोचा-समझा कदम भी हो सकता है, जिसमें सत्ता संगठन, समीकरण और भविष्य की संभावनाओं का पूरा खाका तैयार किया जा रहा है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि यह बदलाव केवल कार्यक्रमों तक सीमित रहता है या फिर मध्यप्रदेश की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत करता है।

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